इदं न मम (Idam Na Mama)
Hardcover – 28 September 2026
आपके हाथों में अपनी एक विशेष पुस्तक सौंपते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता और भावुकता का अनुभव हो रहा है।
पुस्तक का नाम है — ‘इदं न मम’।
यह मेरे पिताजी, स्वर्गीय गजानन्द जी आर्य, की आत्मकथा है। इसमें उनके जीवन से जुड़े इतिहास, घटनाएँ, अनुभव, विचार और अनेक प्रसंग ऐसे हैं, जिन्हें मैंने उनके जीवनकाल में उनसे सुना, समझा और संजोया है। उन्हीं स्मृतियों और संवादों को शब्दों का रूप देकर इस पुस्तक में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
पुस्तक का आवरण और समग्र सज्जा की कल्पना एवं निर्माण हमारी बहू रानी समीक्षा — मेरे पुत्र पराग की पत्नी — ने किया है। उसकी सृजनात्मक दृष्टि ने इस स्मृति-ग्रंथ को एक विशेष स्वरूप प्रदान किया है।
‘इदं न मम’ केवल एक व्यक्ति की आत्मकथा नहीं है।
यह हमारे आर्य परिवार की लगभग दो शताब्दियों की यात्रा को दर्ज करने का एक प्रयास है। इसमें लगभग 1800 के कालखंड से हमारे परिवार का इतिहास, वंशावली, पिताजी के जीवन के विभिन्न दशक, अनेक पुराने और नए छायाचित्र तथा उनसे जुड़ी स्मृतियाँ समाहित हैं।
इसमें हमारे पैतृक गाँव शेरडा का इतिहास भी शामिल किया गया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि शेरडा गाँव के इतिहास और उसकी सामाजिक स्मृति के लिए भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकती है।
मैंने इस पुस्तक की भाषा को सहज और सरल रखने का प्रयास किया है, ताकि इसे पढ़ते हुए पाठक केवल घटनाओं को जानें ही नहीं, बल्कि उनमें छिपे रिश्तों, संघर्षों, संवेदनाओं, मूल्यों और मानवीय भावनाओं को भी महसूस कर सकें।
आपसे मेरा आग्रह है कि जब भी समय मिले, इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। इसे केवल एक पुस्तक की तरह नहीं, बल्कि एक परिवार, एक पीढ़ी और एक समय की जीवंत स्मृतियों की तरह देखें।
पुस्तक पढ़ने के बाद आपकी प्रतिक्रिया, विचार और सुझाव मेरे लिए अत्यंत मूल्यवान होंगे। आप मुझे अपनी बात ई-मेल के माध्यम से अवश्य लिखें:
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